Monday, 13 August 2018

रेडियो म बकबकावत हे

हमर मुखिया ह रेडियो म बकबकावत हे
मंडमाड़े अपन गुन गावत हे
रंग-रंग के गोठ म
लोगन ल भरमावत हे
एती गांव-सहर के मनखे
डेंगू-पीलिया म मरत जावत हे
जउन गांव म
न हास्पिटल के ठिकाना न डाक्टर के
उहां घलो बिकास के गंगा बोहावत हे

किसान मरत हे करजा म
फेर आय ल दुगुना बतावत हे
आनी-बानी के वादा करके
थूक-थूक म बरा चुरोवत हे
न धान के भाव बढ़िस
न किसान के इसथिति सुधरिस
तभो ले छत्तीसगढ़ ह
धान के कटोरा कहलावत हे

चुनाव के बेरा म
लेपटाप, टेबलेट, मोबाइल बटवावत हे
छेरी ल हरियर चारा के
लालच देखाके कटवावत हे
सरकारी इसकूल ल बंद करा के
जगह-जगह पराइवेट इसकूल खोलवावत हे
लइकामन निकलगे भोकवा
तभो ले हुसियार कहलावत हे
हमर मुखिया ह रेडियो म बकबकावत हे।

- गौतम गणपत

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