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Thursday, 13 January 2022

डर की वजह से समाज में व्याप्त है अंधविश्वास



आज के वैज्ञानिक युग में भी लोग अंधविश्वास के जाल से नहीं निकल पा रहे हैं। पढ़-लिख कर भी लोग अंधविश्वास की खाई में जाकर गिर रहे हैं। विज्ञान पढ़ने वाले अवैज्ञानिक और कुतर्क की ओर बढ़ रहे हैं। इन सबके प्रमुख कारण डर (fear) है। लोगों के मन में पहले से भूत-प्रेत, डायन, भगवान और स्वर्ग-नर्क का डर बैठा दिया हैं।

इस डर से लोगों में एक सामान्य चिंता विकृति जिसे फोबिया (phobia) कहते है, उत्पन्न हो गया हैं। फोबिया मतलब व्यक्ति के लिए कोई खतरा नहीं होता है तो भी व्यक्ति उस वस्तु या परिस्थिति से डरता हैं। भूत (ghosts) का डर जिसे फासमोफोबिया कहते हैं। व्यक्ति भूत के डर से अंधेरे कमरे या अंधेरी जगह से डरते हैं, जबकि भूत नहीं होता। इसलिए व्यक्ति का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा तो भी उससे डरता हैं।

ईश्वर (God) का डर जिसे थियोफोबिया (theophobia) कहते है। लोग ईश्वर के डर के कारण पुजारियों की झोली भरते हैं। डोंगी, ओझा पुजारियों ने स्वर्ग-नरक व पाप-पुण्य के नाम से ईश्वर के डर दिखकर लोगों को ठगते हैं। जबकि ईश्वर मनुष्य के नुकसान क्यों करेगा क्योंकि ईश्वर भ्रम मात्र है।

- टिकेश कुमार, मनोवैज्ञानिक

Sunday, 21 November 2021

नींबू-मिर्च लटकाना अंधविश्वास का प्रतीक

एक नींबू के साथ ऊपर और नीचे पांच या सात मिर्च धागे से बंधे बहुत से घर, दुकान व दफ्तर का चौखट पर लटके आपको देखने को मिल ही जाएगा।

नींबू-मिर्च लटकाने वालों का मानना होता है कि नींबू-मिर्च बुरी आत्मा व किसी की बुरी नजर से बचाते हैं। अब आप थोड़ा से तर्क लगाइए क्या कोई बुरी आत्मा या बुरी नजर  है? कोई बुरी आत्मा नहीं होता। बुरी आत्मा होता तो आज तक किसी वैज्ञानिक ने उस आत्मा को खोज निकाल चुके होते।

न कोई बुरी नजर होती है। किसी की भी नजर बुरी नहीं होती हैं। अगर किसी व्यक्ति की नियत चोरी या डाका करना है, तो उसे नींबू-मिर्च से बंधे ठुवे रोक नहीं पाएगा और न ही रोका हैं। आए दिन सुने मकान में चोरी या दुकान से नगदी चोरी के मामले उसी घर और दुकान से सुनने में मिलती है।

इस अंधविश्वास के कारण नींबू-मिर्च की कीमत बढ़ गई हैं। हर रोज नींबू-मिर्च खरीदकर पुराना की जगह पर नया लटकाना। रोज सुबह-सुबह रोड, गली और रास्ते पर सुखा नींबू-मिर्च फेंके देखने को मिल ही जाएंगे। अंधविश्वासी राहगीर इससे बचने के चक्कर में आए दिन दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इस महंगाई से लोग खाने के लिए नींबू-मिर्च नहीं खरीद पा रहे, लेकिन अंधविश्वास के लिए अपनी जेब  ढ़ीली कर रहे हैं। साथ ही अंधविश्वासी होने का परिचय दे रहे हैं। 
नींबू लटकाने की शुरुआत एक अंधविश्वासी से हुई थी। अक्सर बिना विवेक के लोग भेड़ धसान चलते हैं। एक कुछ करें तो बिना सोचे-समझे उसके पीछे चलते हैं। 

एक बार एक व्यक्ति बहुत बीमार पड़ता था। तब वह आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास गए। तब चिकित्सक ने उसे रोज नींबू-मिर्च खाने की सलाह दी। वह व्यक्ति रोज नींबू-मिर्च खरीदकर खाता और जो बच जाता उसे घर के चौखट पर लटका देता। नींबू से विटामिन सी और मिर्च से विटामिन ए मिलने लगा और वह स्वस्थ हो गया। यह देखकर उसके पड़ोसी भी इसकी नकल करने लगा। वह भी रोज नींबू-मिर्च खरीदकर चौखट से लटकाता। इस प्रकार यह अंधविश्वास का दौर शुरू हुआ। इसलिए किसी भी चीज को अपनी बुद्धि की कसौटी में कसिए फिर वह काम करिए।

- टिकेश कुमार