Tuesday, 24 August 2021

नास्तिक

मनुष्य जन्म से नास्तिक होता हैं।
पैदा होने के बाद 
उसके वातावरण जैसा होता हैं, 
वैसे ही बन जाते हैं।

जो व्यक्ति विज्ञान को मानते हैं,
उसके बच्चे नास्तिक बन जाते हैं।

जिस परिवार में अंधविश्वास 
और धार्मिक पाखंड है,
उस परिवार के बच्चे 
आस्तिक बन जाते हैं।

कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं,
जो आस्तिक वातावरण में 
पैदा होने के बाद भी 
नास्तिक बन जाते हैं।
इसका कारण है, 
ये वातावरण से संघर्ष करते हैं,
वैज्ञानिक तर्क से अध्ययन करते हैं 
और विवेक से सोचते हैं।

-टिकेश कुमार

लड़ाई में साथ दें

फूल- जल, जंगल और जमीन
पौधे - मूलनिवासी, आदिवासी और जनता
कांटे - नक्सली (माओवादी)
फूल को तोड़ने वाली- सरकार
पौधों और कांटों को नष्ट करके 
फूलों पर कब्जा करने वाला - पूंजीपति।

सरकार फूलों को तोड़कर 
पूंजीपतियों को देना चाहती है
पौधे फूलों को छोड़ना नहीं चाहते,
इसलिए सरकार से लड़ने के लिए तैयार हैं।

कांटे फूल की हिफाजत करते हैं,
कभी-कभी पौधों को भी चुभ जाते हैं
आज फूल और पौधे बचे हैं 
उसका मुख्य कारण कांटे हैं।

पूंजीपति चाहते हैं, 
फूल उसके पास हो
जिससे फूलों का मीठा रस 
पीकर पले-बढ़े
पूंजीपति के इशारे पर 
सरकार बार-बार फूलों के लिए
पौधों पर हमला करती हैं
लेकिन कांटे बीच में आकर 
रास्ता रोक देते हैं।

एक ओर सरकार 
पौधों की रक्षा करने का ढोंग करती है,
दूसरी ओर सैनिक कैंप लगाकर 
पौधों के ऊपर अत्याचार करती है।

कांटों को खत्म करने के नाम पर
सरकार अरबों रुपए खर्च करती हैं
कांटे को खत्म करते-करते 
कहीं पौधों को ही 
जड़ से खत्म न कर बैठे।

हम सब को चाहिए कि फूलों को
पूंजीपति के हाथों में जाने से रोके
फूलों की हिफाजत करें, 
पौधों की इस लड़ाई में साथ दें।

- टिकेश कुमार

भारत के प्रमुख नास्तिक

भारत के प्रमुख नास्तिक

1. महात्मा गौतम बुद्ध

2. तीर्थकर महावीर

3. अजित केशकम्बल

4. धर्मकीर्ति

5. एच.एल.बी. डेरोजियो

6. ज्योतिबा फुले

7. राधामोहन गोकुलजी

8. स्वामी अछूतानंद 

9. पेरियार ई.वी. रामासामी

10. प्रेमचंद

11. लाला हरदयाल

12. मानवेन्द्र नाथ रॉय

13. स्वामी सहजानंद सरस्वती

14. जवाहर लाल नेहरू 

15. भीमराव आंबेडकर

16. जे. बी. एस. हाल्डेन

17. राहुल सांकृत्यायन

18. गुरबक्श सिंह 'प्रीत लड़ी

19. अब्राहम टी. कोवूर

20. के. शिवराम कारंत

21. गोपारातू रामचंद्र गोरा

22. शहीद भगत सिंह

23. दामोदर धर्मानंद कोशाम्बी 

24. मख्दूम मोहियुद्दीन

25. ई.एम.एस. नंबूदिरीपाद

26. विट्ठल महादेव तारकुंडे

27. महाकवि श्री श्री

28. डॉ. राममनोहर लोहिया

29. एस चन्द्रशेखर 

30. नागार्जुन

31. केदारनाथ अग्रवाल

32. फैज अहमद फैज

33. ललई सिंह यादव 

34. रामविलास शर्मा

35. सरस्वती गोरा

36. हंसराज रहबर

37. बलराज साहनी

38. अली सरदार जाफरी

39. ज्योति बसु

40. लक्ष्मी स्वामिनाथन सहगल

41. बाबा आम्टे

42. खुशवंत सिंह

43. हरकिशन सिंह सुरजीत

44. गजानन माधव मुक्तिबोध

45. शिवदान सिंह चौहान

46. देवीप्रसाद चटोपाध्याय

47. ए.बी. शाह

48. शिबनरायन रे

49. साहिर लुधियानवी

50. भारतरत्न सत्यजित रॉय

51. मधु लिमये

52. रांगेय राघव

53. रामस्वरूप वर्मा

54. डॉ. दत्तात्रेय धोंडोपंत 

55. अबू अब्राहम 

56. आर. पी. सराफ

57. महाश्वेता देवी

58. डॉ. मस्तराम कपूर

59. राही मासूम रजा

60. डॉ. श्रीराम लागू

61. विजय तेंदूकर

62. डॉ. पुष्प मित्र भार्गव

63. सच्चिदानंद सिन्हा

64. किशन पटनायक

65. बासव प्रेमानंद 

66. गीतेश शर्मा

67. अमर्त्य सेन

68. डॉ. के. वीरामणि 

69. मनिशंकर अय्यर

70. स्वामिनाथन अय्यर

71. शंकर गुहा नियोगी 

72. हमीद दलवाई

73. जावेद अख्तर

74. डॉ. नरेंद्र दाभोलकर

75. माणिक सरकार

76. विनायक सेन

77. कमल हासन

78 अरुंधती रॉय 

79. रामगोपाल वर्मा

80. तसलीमा नसरीन

Tuesday, 22 June 2021

आरंग क्षेत्र से एम्स को पहला देहदान

रायपुर। आरंग के ग्राम बिरबिरा निवासी मेहत्तरू साहू (94) का निधन रविवार 3 नवम्बर 2019 को सुबह 8 बजे हो गया। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स को देहदान की घोषणा इसी साल 27 फरवरी 2019 को कर चुके थे। उनकी इच्छानुसार उनके बेटे मोतीलाल साहू ने 3 नवंबर को देहदान कराया। एम्स में आरंग क्षेत्र का यह पहला देहदान है। ग्रामीणों के बीच मेहत्तरू साहू ने रूढ़ीवादी सोच को ठुकराते हुए एक बेहतर कार्य किया। परिजनों की सहमति पर उनका पार्थिव शरीर लेकर एम्स के शरीर रचना विभाग के कर्मचारी राम भुवन पटेल रविवार सुबह रायपुर एम्स पहुंचे। मरने के बाद भी मेहत्तरू साहू का पार्थिव शरीर चिकित्सिा विज्ञान के क्षेत्र में देश के लिए काम आएंगे। मेहत्तरू साहू की बहुत इच्छा थी कि देहांत के बाद उनका शरीर चिकित्सालय में दिया जाए। वे फुलसिंग साहू के भाई, मोती लाल के पिताजी, अनुसुइया के ससुर और कैलाश कुमार, पत्रकार गनपत, टिकेश्वर के दादाजी थे। 

Monday, 10 May 2021

कोरोना ले जियादा लाकडाउन म जावत हे मनखे के जान

जबले कोरोना आए हे, तब ले मनखे के जीना हराम होगे हे. सुख चैन ह छीन गे हे. बिहिनिया अखबार ल खोलबे त कोरोना, मोबइल म कोनो ल फोन करबे त कहिथे कोरोना, टीवी ल चालू करबे त कोरोना, रेडियो ल सुनबे त कोरोना, सोसल मिडिया म कोरोना, बस कोरोना-कोरोना छाए हे. भइगे जउन मेर देखबे-सुनबे कोरोना के गोठ चलत हे. लइका से लेके सियान तक सब कोरोना के मारे परसान हे. कोरोना ले जियादा लाकडाउन ह जिवलेवा होगे हे. कोरोना के समय साल भर म तालाबंदी के चक्कर म करोड़ों मनखे के रोजगार छीन गे.

देस के ज्यादातर राज म तालाबंदी कर देहे. लॉकडाउन के दौरान लाखों मनखे ल अपन नौकरी ले हाथ धोय बर पड़ीस. ये साल अप्रैल म 70 लाख ले जियादा लोगन के नौकरी ह छूट गे. ये मै नइ काहत हंव रिसर्च फर्म सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी ह काहत हे.  एकर सेती देस म बेरोजगारी दर बढ़ के 7.97 फीसदी होगे हे. पहली मार्च म 6.5 फीसदी रहिस. अइसने पूरा कोरोना काल के बात करबे त करोड़ों मनखे के नौकरी ह छूट गे. कतको ह ये दुख ल नइ सह सकिस त आत्महत्या करके मरगे. कतको के भूख म जीव जावत हे. कतको मनखे के इलाज के अभाव म जीव छूटत हे. देस भर म हाहाकार माचे हे. 

कोरोना ले बाचे बर सरकार अस्पताल अउ स्वास्थ सुविधा ल बढ़ाय बर छोड़ के लॉकडाउन ल लगातार बढ़ावत हे. अउ काहत हे कि घर ले कोनो बहिर मत निकलव. घर म राहव स्वस्थ अउ सुरक्षित राहव. अरे भईया ये सरकार ल कोन समझाय मनखे घर म रही त खाही का ला. बिना खाय कुपोसन अउ भूख म लोगन ह मरत हे. नवा-नवा बीमारी ह मनखे ल पकड़त हे. फेर का करबे कोरोना के चक्कर म ओपीडी ल बंद कर दे हे. कोरोना के सेती दूसर बीमारी के इलाज नइ होवत हे. तालाबंदी के सेती बस अउ दूसर यातायात के साधन ल बंद कर दे हे. मनखे बीमार पड़त हे त ओकर प्राण घर म छुट जावत हे अस्पताल नइ आ पावत हे. 

सबले ज्यादा रोज के दिहाड़ी करइया गरीब मनखे ह परेसान हे. रोजी-रोटी बिना बिचारामन तरसत हे. घर म खाय बर नइ हे. अपन अउ अपन लइका के पेट ल भर नइ पावत हे. मजदूरी करइयामन रोज पूछथे कब लाकडाउन खुलही त कब काम म जातेन. रो-रो के दिन ल काटत हे. सोच-सोच के बिचारामन ल नींद नइ आवत हे. इकर कोनो देखइया नइ हे. कोनो एकर दरद ल समझइया नइ हे. केंद्र अउ राज सरकार ह लाकडाउन-लाकडाउन खेलत हे. आम जनता के जीव ह रोज जावत हे. काही बीमारी होवत हे त पहली कोरोना के जांच कराय ल काहत हे, तब तक मनखे के जीव ह छूट जावत हे. 

देस भर म अफरा-तफरी मचे हे. मरीज बर अस्पताल नइ हे. अस्पतला हे त खटिया नइ हे. खटिया हे त डॉक्टर नइ हे. डॉक्टर हे त ऑक्सीजन नई हे. दवई अउ इंजेक्शन नइ हे. अउ कतेक ल लमाबे. मरीज के जान ह अस्पताल के अव्यवस्था के सेती जावत हे. कोरोना के आड़ म गोली-दवई के कालाबाजारी होवत हे. सासन-प्रसाशन अस्पताल के अव्यवस्था ल सुधारे बर अउ कालाबाजारी ल रोके म लाचार साबित होवत हे. ठीक से अस्पताल अउ स्वास्थ बेवस्था नइ कर पावत हे. जनता के जीव ह बदइन्तजामी म जावत हे. मनखे के लास ल जलाय बर लकड़ी नइ हे. दफनाय बर जमीन नइ हे.

चारो मुड़ा रोहा-राही मचे हे. फेर सरकार ल कोनो संसो नइ हे. इहा के नेतामन ल कइ राज के चुनाव के रैली-सभा ले फुरसत नइ मिलिस. अब चुनाव होइस त समीक्षा म जुटे हे. हारेन त काबर हारेन. फेर अपन जनता के बिलकुल ख्याल नइ हे. चुनाव ले खाली होईस त अब लाकडाउन-लाकडाउन चिल्लावत हे. ये तो अइसे होगे जइसे बिलइ ह सौ मुसवा ल खाके हज जाथे. लाखो के भीड़ म सामिल होके आज जनता ल काहत हे घर म राहव अउ सोसल डिस्टेंसिंग के पालन करव. वाह रे सरकार तोर पार ल कोई नइ पाय. बली के बकरी गरीब मनखे ह बनथे. बाकी तो नेतामन आनी-बानी के गोठियावत हे अउ बकबकावत हे.

गनपत लाल साहू, रायपुर

Sunday, 7 March 2021

तिहार के नांव म झन होय जल-जंगल के नास

होरी तिहार ल परेम, भाईचारा अउ मेलजोल के तिहार कहे जाथे। फेर का करबे अब तिहार के रंग-रूप ह बिगड़त जावत हे। मनखे ह ए तिहार ल दारू, गांजा अउ भांग के बना लेहे। त दूसर डाहर हर साल तिहार के नाम म कतको पेड़मन के बलि चड़हत जावत हे अउ पीये बर पानी नइ हे फेर रंग घोर के रिकोवत हन। एक डाहर परियावरन ल बचाय बर लकड़ी के चूल्हा नइ जलाय बर काहत हे त दूसर डाहर मनखे ह आसथा के नांव म भारी संख्या म पेड़ ल काट के जंगल के नास करत हे। एक डाहर पानी बचाय के आंदोलन चलत हे त दूसर डाहर तिहार के नांव म करोड़ो लीटर पानी ल फोकट म उलचत हे। ए ह गुने के गोठ आय। 
का कोनो माइलोगिन ल जला के जसन मनाना उचित हे। हमर देस के संसकिरिति के रग-रग म मया-दुलार समाय हे। फेर अइसन काकरो मउत म उच्छाह मनाना कतेक जायज हे। भारी संख्या म लकड़ी ल नइ जला के अपन आस-पास पड़े कचरा ल सकेल के जलाना चाही। ए दिन कसम खाना चाही कि सबो बुराई ल तियाग के भाईचारा, सदभावना अउ परेम ल अपनाबो। 
देस भर म परंपरा के नांव म परियावरन के साथ खेलवाड़ होवत हे। अपन आप ल जागरूक कहइया मनखे ह घलो ए दिन होलिका दहन बर जंगल अउ दूसर जगह ले लकड़ी सकेल के जलाथे। आज धीरे-धीरे जंगल के नास होवत हे। एकर ले कई परकार के जीव-जंतु नंदावत घलो हे। पेड़-पौधा के हरियाली के नामो-निसान मेटावत हे। फेर हमन काबर परियावरन अउ खुद के नुकसान करे म अड़े हाबन। गांव हो या सहर सबो जगह होली के दहन करके खुसी मनाथन। एकर बर कई पेड़मन के बलि देवा जथे। लकड़ी के जले ले हवा ह दूसित हो जाथे। एकर ले मनखे ल सांस ले म बड़ दिक्कत जाथे अउ फेफड़ा ले संबंधित कई बीमारी घलो हो जाथे। उहीं जले राख अउ लकड़ी ह तरिया-नदिया के पानी ल खराब कर देथे। 
एक बात अउ समझ नइ आय कि हमन 8 मार्च के बड़ जोरसोर ले महिला दिवस मनाथन अउ माइलोगिनमन के सम्मान करथन। ओकर बाद मार्च में ही एक महिला होलिका ल जला के खुसी मनाथन। ये कइसन समाज आय। ऐकर ले हमर अवइया पीढ़ी ल महिला के परति नफरत करे के सीख देवत हन। हमन ल ए जुन्ना रूढ़ी-परंपरा ल छोड़ के परियावरन अउ समाज ल बचाय के कसम खाना चाही। अब होलिका दहन बंद करके होलिका चमन के नांव ले जगह-जगह पेड़ लगावन अउ महिलामन के परति परेम के संदेस देवत हरियाली फैलावन। अइसन होतीस त कतेक सुघ्घर लागतीस। 

गनपत लाल, रायपुर