Thursday, 14 October 2021

क्या होगा देश का ?

अपने माँ-बाप कोई न पूजे,
पूजे मिट्टी की माता।
घर में मारा-मारी तेल का
मंदिर में तेल के जोत जलाए। 
क्या होगा देश का ?

भूख मरे या कर्ज़ में दबे,
माता की मूर्ति बैठाए।
नौ दिनों तक माता पूजे,
दसवें दिन पत्नी गाली खाए।
क्या होगा देश का ?

मिट्टी की माता पूजने से,
क्या गरीबी दूर होती है देश की,
तो देश में इतने गरीब कहा से आए।
क्या होगा देश का ?

टिकेश कुमार (रचना 2018)

Thursday, 7 October 2021

'राम वन गमन पथ' बीजेपी की राह पर कांग्रेस


छत्तीसगढ़
 में आखिर राम गमन पथ क्यों? केंद्र में बैठी बीजेपी हो या राज्य में हिलती-डुलती कांग्रेस दोनों का पथ राम के नाम पर जनता की कमाई के पैसे को पानी की तरह बहाना हैं. सरकार अखबारों के पन्नो पर बड़े-बड़े अक्षरों में विज्ञापन देकर जनता के पैसे को पूरी तरह से बर्बाद कर रही है.

आदिवासी और छत्तीसगढ़ के हितैषी होने का ढोंग करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल यहां की आदिवासी संस्कृति को हमेशा रौंदने का काम किया है. कांग्रेस की सरकार रामायण कार्यक्रम, कौशिल्या मंदिर और राम गमन पथ के लिए सैकड़ो करोड़ रुपए बर्बाद कर रही है. राम के प्रति इतनी भक्ति है तो भक्त होने का ढोंग करने वाले अपने घर के पैसे से अपनी जमीन पर मंदिर क्यों नहीं बनाते. जनता के पैसे और सरकारी जमीन पर धार्मिक कर्म क्यों?

भूपेश बघेल अपने को किसानों के हितैषी होने का ढिंढोरा पिटते हैं, लेकिन यहां के किसानों और आदिवासियों को उनका सही हक दिलाने की जगह आरएसएस के एजेंडे को लागू करने में लगे हुए हैं. छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासियों की गुड़ी को तोड़कर राम वन गमन पथ बनाया जा रहा है. सरकार आदिवासियों की संस्कृति और पहचान पर बुलडोजर चलाने का काम कर रही है.

छत्तीसगढ़ में जाति और धर्म के नाम पर कभी लड़ाई नहीं हो रही थी, लेकिन अब यहां लगातार अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं. पिछले महीने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती थाने के अंदर दक्षिणपंथी हिंदू भीड़ ने एक पादरी की जूते-चप्पल से पिटाई कर दी. लेकिन पुलिस मूकदर्शक बने देखती रही. कवर्धा में मुस्लिम समुदायों पर रोज हमले हो रहे हैं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, लेकिन सरकार इसे रोकने पर पूरी तरह से नाकाम हो गई है. अब यह नफरत की आग प्रदेशभर में फैले इससे पहले सरकार को कोई ठोस कदम उठाना होगा.

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के नेता छत्तीसगढ़ को धर्म के नाम पर बांटने और माहौल खराब कर अपनी राजनितिक रोटी सेंकने में लगी हुई है. भाजपा की सरकार हमेशा किसानों और मजदूरों की उपेक्षा करती आ रही है. अपनी ओझी मानसिकता की वजह से यहां की भोली-भाली जनता को जाति-धर्म के मुद्दे में उलझाकर मूलभूत समस्या से दूर रख रही है. अब यहां के लोगों को समझना है कि हमें मोहब्बत की राह पर चलना है या नफरत के पथ पर.

- टिकेश कुमार

Sunday, 12 September 2021

इससे बड़ी उल्टी कल्पना और असंगत बातें कुछ नहीं

कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने अपने एक संबोधन में गणेश के गजमुख और शरीर की कथा को अंग प्रत्यारोपण का प्राचीन उदाहरण बताया था। क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है ? यह सोचने की बात है। आज के अाधुनिक और वैज्ञानिक युग में हम काल्पनिक और असंगत बातों पर विश्वास कर सकते हैं ? चलिए आज विचार करते है गणेश कौन है ? क्या गणेश शिवजी और पार्वती का पुत्र है ? बिलकुल नहीं क्योंकि कहा जाता है कि पार्वती ने अपनी रक्षा के लिए शरीर की मैल से गणेश की रचना की। यह बात तो बड़ी हास्यास्पद है। क्या कोई बच्चा का जन्म बिना गर्भधारण के हो सकता है ? अज्ञान भरी प्रकृति विरूद्ध बातों का इतना अधिक प्रचार लगातार किया गया कि लोगों की सोचने की शक्ति ही समाप्त हो गई। जब पार्वती ने गणेश की रचना की उस समय उनका मुख सामान्य था। माता पार्वती स्नानागार में नहा रही थी तब गणेश को बाहर पहरेदारी का आदेश दिया। पार्वती ने कहा कि जब तक वह स्नान कर रही हैं तब तक के लिए घर में प्रवेश न करने दे। तभी द्वार पर भगवान शंकर आए और बोले यह मेरा घर है मुझे प्रवेश करने दो। गणेश के रोकने पर शिवजी ने क्रोध में अपने लड़के का सिर काट दिया।
जब पार्वती रोई तो उन्होंने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर उसे बच्चे के कंधों पर रखकर जोड़ दिया और वह बच्चा जिंदा हो कर गणेश कहलाए। उल्टी कल्पना की हद होती है। इस बात को जानने वाला व्यक्ति जब तक एकदम विवेक बुद्धि से शून्य न हो तब तक इस प्रकार की असंगत बात स्वीकार ही नहीं कर सकता। किसी भी काल में हाथी और मनुष्य के शरीर में अंतर कदाचित वैसा ही रहा है जैसा की आज है। अब किसी के मस्तिष्क में कैसे घुस सकती है कि जब बालक के दोनों कंधे हाथी के सिर के अंदर आसानी से चले जाते हैं तब हाथी का सिर उस बालक के कंधों के ऊपर कैसे टिका रह गया ? क्या बालक हाथी के अंदर नहीं समा जाता ? तो बालक के सिर के स्थान पर हाथी का सिर चिपका कैसे और जब चिपका ही नहीं तो जुड़ा कैसे ? दूसरा सवाल है कि हाथी की खाल व मांस का मेल आदमी के मांस व खाल का नहीं होता, हाथी से मनुष्य के किसी अंग का जोड़ना असंभव है। ऐसी प्रकृति विरूद्ध बात संभव करने की क्षमता किसी में नहीं। इतना ही नहीं विशालकाय गणेश जी की सवारी चूहा को बताया जाता है। जरा सोचिए इतना भारी-भरकम शरीर वाला आदमी चूहा पर बैठेंगे तो क्या होगा ? गणेश और उनका जन्म ही पूरी तरह से काल्पनिक है। क्या कोई शरीर के पसीने या मैल से बच्चा पैदा हो सकता है ? वह बच्चा पैदा होते ही इतना बड़ा हो जाता है कि पहरेदारी करने लगे ? क्या कोई इंसान के चार हाथ हो सकता है ? किसी आदमी का सिर काटकर हाथी का सिर जोड़ पाना संभव है ? अगर जुड़ भी गया तो जैसा गणेश जी की मूर्ति या फोटाे में जो रूप दिखाया जाता है वैसा बिलकुल नहीं होगा। हाथी का सिर बड़ा रहेगा और पूरा रंग काला रहेगा। मनुष्य के कटे सिर पर जब हाथी को जोड़ा जाएगा तो उनकी आंखे और मुख आसमान को देखते हुए रहेगा न की सामने।
खैर यह काल्पनिक बातों को छोड़िए आज गणेश जी के नाम पर जो पर्यावरण के साथ खिलवाड़ हो रहा है वह कितना जायज है ? हर साल करोड़ों की तदाद में जगह-जगह बड़ी-बड़ी मूर्तियां स्थापित की जाती है। ये मूर्ति प्लास्टर आफ पेरिस और खतरनाक रंगों से बनी होती है, जिसे तालाब, नदी, नाले और अन्य जल स्त्रोतों में विसर्जन करते हैं। क्या इससे हम नदी, तालाब, नाले का पानी को प्रदूषित नहीं कर रहे है ? जगह-जगह मूर्ति स्थापना के नाम पर सड़क को घेरकर आने-जाने वालों को परेशान नहीं कर रहे है ? भारी आवाज में लाउंड स्पीकर बजाकर क्या स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे और हास्पिटल में जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहे मरीजों को परेशान नहीं कर रहे हैं ? क्या इस मूर्ति से किसी व्यक्ति या जीव को कोई लाभ है ?

- गनपत लाल

Tuesday, 24 August 2021

हिंदू कौन है ?

धर्म की राजनीति करने वालों ने,
देश के भोले-भाले लोगों के मन में,
धर्म के नाम पर नफरत करना सिखाया 
समाज में धर्म के जहर फैलाया
लोगों को धर्म के जहर का घूंट पिलाया
हिंदू-मुस्लिम के नाम से लड़ाया
 
पांच प्रतिशत मनुवादी हिंदू,
ओबीसी, एसटी, एससी को हिंदू बताया
वोटबैंक के लिए लोगों को हिंदू बताया
कौन कहता है ओबीसी हिंदू है?
कौन कहता है एसटी हिंदू है?
कौन कहता है एससी हिंदू है?

इतिहास गवाह है
हमें जबर्दस्ती हिंदू बताया गया है 
हमें हिंदू धर्म देकर नीची जाति बताई गई
चार वर्ण में हमें शूद्र नीच बताया गया हैं
और हम पर हिंदू के नाम पर शोषण किया
आर्य (ब्राम्हण) ने हमें भाई बताकर ठगा हैं

आर्य कौन है?
आर्य भी विदेशी हैं, ईरानी हैं,
आर्य सबसे पहले भारत में 
मूलनिवासी को खदेड़ कर बसा
जिसे अब ब्राम्हण कहते हैं

हमारे हाथ में मनुस्मृति देकर
हमें भगवान की पूजा करने को कहा
और हम पूजा-पाठ में मस्त थे
ये लोग हमारी जमीन छीन ली
क्या अब भी हम हिंदू हैं?

- टिकेश कुमार

जनता होवत हे दारू म बर्बाद

दारू ल बंद कर देतेव ग सरकार
जनता होवत हे दारू म बर्बाद।
दिनभर हटर-हटर मेहनत करथे
संझा होते साथ दारू भट्टी जाथे।

पिथे ताहन नसा के भूत चढ़ जाथे
घर के कपाट ल गारी देके खटखटाथे
डउकी निकलथे त बाजा कस बजाथे
फेर घर म कूद-कूद के लड़ई मचाथे।

कतेक मनखे के घर-द्वार छुटगे
कतेक घर दारू म जलगे
कतेक खेत दारू म बिकगे
कतेक मनखे अपराधी बनगे।

दारू के सेती घर बिगड़गे
दारू के सेती गांव बिगड़गे
दारू के सेती राज-देस सड़गे।

दारू ले नेता अउ चमचा बनगे
दारू ले राजनीति बिगड़गे
दारू म मतदाता बिकगे
फेर बिकगे पूरा देस
अब तो बंद कर देतेव ग सरकार
जनता होवत हे दारू म बर्बाद।

- टिकेश कुमार, रायपुर

नई सुबह पुकार रही

सत्ता के लिए
जनता को धर्म के नाम पर लड़ाकर
खुद कुर्सी पर बैठ गया
सत्ता की कुर्सी ऐसी है कि 
बैठते ही चुम्बक की तरह चिपक जाते हैं

चुनाव आते ही
नेताओं पर धर्म का रंग चढ़ जाते हैं
राम के नाम पर
मंदिर के निर्माण पर
जात-धर्म के नाम पर
वोट मांगने लगते हैं

स्वास्थ्य,शिक्षा, सुरक्षा व रोजगार
जैसी मूलभूत आवश्यकता को
तिलांजलि देकर
हिन्दू के नाम पर
चुनाव जीतकर
पूंजीपतियों की सेवा में लग जाते हैं

जनता से अपील हैं
कब तक धर्म की काली रात में
रहोगें
कब तक धर्म की गहरी नींद में
सोएंगे
उठो मेरे योद्धाओं
नई सुबह हमें पुकार रही हैं
उठो मेरे वीरों
नई सुबह की रोशनी जगा रही हैं।

-टिकेश कुमार

नास्तिक

मनुष्य जन्म से नास्तिक होता हैं।
पैदा होने के बाद 
उसके वातावरण जैसा होता हैं, 
वैसे ही बन जाते हैं।

जो व्यक्ति विज्ञान को मानते हैं,
उसके बच्चे नास्तिक बन जाते हैं।

जिस परिवार में अंधविश्वास 
और धार्मिक पाखंड है,
उस परिवार के बच्चे 
आस्तिक बन जाते हैं।

कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं,
जो आस्तिक वातावरण में 
पैदा होने के बाद भी 
नास्तिक बन जाते हैं।
इसका कारण है, 
ये वातावरण से संघर्ष करते हैं,
वैज्ञानिक तर्क से अध्ययन करते हैं 
और विवेक से सोचते हैं।

-टिकेश कुमार

लड़ाई में साथ दें

फूल- जल, जंगल और जमीन
पौधे - मूलनिवासी, आदिवासी और जनता
कांटे - नक्सली (माओवादी)
फूल को तोड़ने वाली- सरकार
पौधों और कांटों को नष्ट करके 
फूलों पर कब्जा करने वाला - पूंजीपति।

सरकार फूलों को तोड़कर 
पूंजीपतियों को देना चाहती है
पौधे फूलों को छोड़ना नहीं चाहते,
इसलिए सरकार से लड़ने के लिए तैयार हैं।

कांटे फूल की हिफाजत करते हैं,
कभी-कभी पौधों को भी चुभ जाते हैं
आज फूल और पौधे बचे हैं 
उसका मुख्य कारण कांटे हैं।

पूंजीपति चाहते हैं, 
फूल उसके पास हो
जिससे फूलों का मीठा रस 
पीकर पले-बढ़े
पूंजीपति के इशारे पर 
सरकार बार-बार फूलों के लिए
पौधों पर हमला करती हैं
लेकिन कांटे बीच में आकर 
रास्ता रोक देते हैं।

एक ओर सरकार 
पौधों की रक्षा करने का ढोंग करती है,
दूसरी ओर सैनिक कैंप लगाकर 
पौधों के ऊपर अत्याचार करती है।

कांटों को खत्म करने के नाम पर
सरकार अरबों रुपए खर्च करती हैं
कांटे को खत्म करते-करते 
कहीं पौधों को ही 
जड़ से खत्म न कर बैठे।

हम सब को चाहिए कि फूलों को
पूंजीपति के हाथों में जाने से रोके
फूलों की हिफाजत करें, 
पौधों की इस लड़ाई में साथ दें।

- टिकेश कुमार

भारत के प्रमुख नास्तिक

भारत के प्रमुख नास्तिक

1. महात्मा गौतम बुद्ध

2. तीर्थकर महावीर

3. अजित केशकम्बल

4. धर्मकीर्ति

5. एच.एल.बी. डेरोजियो

6. ज्योतिबा फुले

7. राधामोहन गोकुलजी

8. स्वामी अछूतानंद 

9. पेरियार ई.वी. रामासामी

10. प्रेमचंद

11. लाला हरदयाल

12. मानवेन्द्र नाथ रॉय

13. स्वामी सहजानंद सरस्वती

14. जवाहर लाल नेहरू 

15. भीमराव आंबेडकर

16. जे. बी. एस. हाल्डेन

17. राहुल सांकृत्यायन

18. गुरबक्श सिंह 'प्रीत लड़ी

19. अब्राहम टी. कोवूर

20. के. शिवराम कारंत

21. गोपारातू रामचंद्र गोरा

22. शहीद भगत सिंह

23. दामोदर धर्मानंद कोशाम्बी 

24. मख्दूम मोहियुद्दीन

25. ई.एम.एस. नंबूदिरीपाद

26. विट्ठल महादेव तारकुंडे

27. महाकवि श्री श्री

28. डॉ. राममनोहर लोहिया

29. एस चन्द्रशेखर 

30. नागार्जुन

31. केदारनाथ अग्रवाल

32. फैज अहमद फैज

33. ललई सिंह यादव 

34. रामविलास शर्मा

35. सरस्वती गोरा

36. हंसराज रहबर

37. बलराज साहनी

38. अली सरदार जाफरी

39. ज्योति बसु

40. लक्ष्मी स्वामिनाथन सहगल

41. बाबा आम्टे

42. खुशवंत सिंह

43. हरकिशन सिंह सुरजीत

44. गजानन माधव मुक्तिबोध

45. शिवदान सिंह चौहान

46. देवीप्रसाद चटोपाध्याय

47. ए.बी. शाह

48. शिबनरायन रे

49. साहिर लुधियानवी

50. भारतरत्न सत्यजित रॉय

51. मधु लिमये

52. रांगेय राघव

53. रामस्वरूप वर्मा

54. डॉ. दत्तात्रेय धोंडोपंत 

55. अबू अब्राहम 

56. आर. पी. सराफ

57. महाश्वेता देवी

58. डॉ. मस्तराम कपूर

59. राही मासूम रजा

60. डॉ. श्रीराम लागू

61. विजय तेंदूकर

62. डॉ. पुष्प मित्र भार्गव

63. सच्चिदानंद सिन्हा

64. किशन पटनायक

65. बासव प्रेमानंद 

66. गीतेश शर्मा

67. अमर्त्य सेन

68. डॉ. के. वीरामणि 

69. मनिशंकर अय्यर

70. स्वामिनाथन अय्यर

71. शंकर गुहा नियोगी 

72. हमीद दलवाई

73. जावेद अख्तर

74. डॉ. नरेंद्र दाभोलकर

75. माणिक सरकार

76. विनायक सेन

77. कमल हासन

78 अरुंधती रॉय 

79. रामगोपाल वर्मा

80. तसलीमा नसरीन

Tuesday, 22 June 2021

आरंग क्षेत्र से एम्स को पहला देहदान

रायपुर। आरंग के ग्राम बिरबिरा निवासी मेहत्तरू साहू (94) का निधन रविवार 3 नवम्बर 2019 को सुबह 8 बजे हो गया। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स को देहदान की घोषणा इसी साल 27 फरवरी 2019 को कर चुके थे। उनकी इच्छानुसार उनके बेटे मोतीलाल साहू ने 3 नवंबर को देहदान कराया। एम्स में आरंग क्षेत्र का यह पहला देहदान है। ग्रामीणों के बीच मेहत्तरू साहू ने रूढ़ीवादी सोच को ठुकराते हुए एक बेहतर कार्य किया। परिजनों की सहमति पर उनका पार्थिव शरीर लेकर एम्स के शरीर रचना विभाग के कर्मचारी राम भुवन पटेल रविवार सुबह रायपुर एम्स पहुंचे। मरने के बाद भी मेहत्तरू साहू का पार्थिव शरीर चिकित्सिा विज्ञान के क्षेत्र में देश के लिए काम आएंगे। मेहत्तरू साहू की बहुत इच्छा थी कि देहांत के बाद उनका शरीर चिकित्सालय में दिया जाए। वे फुलसिंग साहू के भाई, मोती लाल के पिताजी, अनुसुइया के ससुर और कैलाश कुमार, पत्रकार गनपत, टिकेश्वर के दादाजी थे।